अंतर में प्रभु का अनुभव करें
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज
16 जुलाई 2020
अतिरिक्त संदेश
ध्यानाभ्यास एक प्रयासरहित प्रयास है
जब हम ध्यानाभ्यास करते हैं, तो हमें प्रभु से प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमें वो दें और वो दिखायें जो वे हमारे लिए बेहतर समझते हैं। हमें प्रेम के साथ बैठना चाहिए, जैसे हम एक खाली प्याला हों, ताकि प्रभु हम में अपना दिव्य अमृत उड़ेल सकें।
प्रभु में विश्वास
प्रभु के अदृश्य हाथ की सुंदरता यह है कि कई बार हम सहायता के लिए बहुत अधिक प्रार्थनाएँ करते हैं और हमें वो मिलती भी है। लेकिन कई बार जब हम सहायता माँगते नहीं हैं, तब भी हमें सहायता मिलती है।
प्रेम की खुश्बू को फैलायें
एक सुंदर कहावत है कि “मुस्कराने में पैसे नहीं लगते।” और वो मुस्कान किसी और के जीवन में रोशनी ला सकती है। फिर वो व्यक्ति भी अपने से मिलने वालों के जीवन में खुशियाँ ला सकता है। यह चक्र चलता रहता है और हमारी एक मुस्कान……